Amrish Puri Birthday: 'जा सिमरन जा जी ले अपनी जिंदगी', बॉलीवुड के 'मोगैंबो' के 10 बेहतरीन डायलॉग्स
आज भी जब बॉलीवुड में विलेन्स की चर्चा होती है तो अमरीश पुरी के बिना पूरी नहीं होती है। बॉलीवुड के बेहतरीन विलेन्स में से एक कहे जाने वाले अभिनेता अमरीश पुरी का जन्म 22 जून 1932 में हुआ था। अमरीश पुरी तो हमारे बीच अब नहीं हैं। लेकिन उनकी यादें उनके किरदारों के रूप में आज भी हमारे साथ हैं। अमरीश पुरी ऐसे विलेन्स में शुमार थे, जो हीरो पर भी भारी पड़ता था। फिल्मों में दमदार अभिनय और बेहतरीन डायलॉग के लिए अमरीश पुरी को कई पुरस्कार भी मिले हैं। उनके डायलॉग आज भी लोगों को मुंह जुबानी याद हैं। आइए एक नजर उनके बेहतरीन डायलॉग्स पर..फिल्म- शहंशाह
डायलॉग- टिप बाद में देना तो एक रिवाज है, पहले देना अच्छी सर्विस की गारंटी होती है।
फिल्म- करण-अर्जुन
डायलॉग- मैं तो समझता था कि दुनिया में मुझसे बड़ा कमीना और कोई नहीं है, लेकिन तुमने एन मौके पर ऐसा कमीनापन दिखाया कि हम तुम्हारे कमीनेपन के गुलाम हो गए हैं।
फिल्म- एतराज
डायलॉग- आदमी के पास दिमाग हो तो अपना दर्द भी बेच सकता है।
फिल्म- मिस्टर इंडिया
डायलॉग- मोगैंबो खुश हुआ...
फिल्म- दामिनी
डायलॉग- ये अदालत है, कोई मंदिर या दरगाह नहीं, जहां मन्नतें और मुरादें पूरी होती हैं। यहां धूप बत्ती और नारियल नहीं, बल्कि ठोस सबूत और गवाह पेश किए जाते हैं।
Post a Comment